Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.45.9-10: 'मैं तुम्हें इस प्रकार मुँह लटकाए देखकर बहुत दुःखी हो रहा हूँ। तुम लोग बड़ी विकट परिस्थिति में हो। मैं तुम्हारे लिए क्या कार्य करूँ? यदि मेरी तपस्या के एक चौथाई, एक तिहाई अथवा आधे से भी तुम इस संकट से बच सको, तो कृपया मुझे शीघ्र बताएँ।॥9-10॥ | mahabharat अध्याय 1.45: जरत्कारुको अपने पितरोंका दर्शन और उनसे वार्तालाप । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'मैं तुम्हें इस प्रकार मुँह लटकाए देखकर बहुत दुःखी हो रहा हूँ। तुम लोग बड़ी विकट परिस्थिति में हो। मैं तुम्हारे लिए क्या कार्य करूँ? यदि मेरी तपस्या के एक चौथाई, एक तिहाई अथवा आधे से भी तुम इस संकट से बच सको, तो कृपया मुझे शीघ्र बताएँ।॥9-10॥
‘I am feeling very sad to see you hanging like this with your faces down. You people are in a very difficult situation. What kind of work should I do for you? If you can be saved from this problem by one fourth, one third or even half of my penance, then please tell me quickly.॥ 9-10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥