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mahabharat 1.45.21: इसीलिए हम लोग अपनी सुध-बुध खोकर अनाथों की भाँति इस गड्ढे में लटके हुए हैं। यदि तुम उसे देखो, तो उससे इस प्रकार कहना कि वह हम अनाथों का ध्यान रखे -॥21॥   |   mahabharat अध्याय 1.45: जरत्कारुको अपने पितरोंका दर्शन और उनसे वार्तालाप   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 45: जरत्कारुको अपने पितरोंका दर्शन और उनसे वार्तालाप  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.45.21 
तस्माल्लम्बामहे गर्ते नष्टसंज्ञा ह्यनाथवत् ।
स वक्तव्यस्त्वया दृष्टो ह्यस्माकं नाथवत्तया॥ २१॥
 
 
अनुवाद
इसीलिए हम लोग अपनी सुध-बुध खोकर अनाथों की भाँति इस गड्ढे में लटके हुए हैं। यदि तुम उसे देखो, तो उससे इस प्रकार कहना कि वह हम अनाथों का ध्यान रखे -॥21॥
 
That is why we have lost our senses and are hanging in this pit like orphans. If you see him, then tell him in this manner to take care of us orphans -॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)