Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.45.17: हे ऋषिवर! हमारे वंश का नाश होने से हम पुण्यलोक से च्युत हो गए हैं। हमारी घोर तपस्या नष्ट हो गई है, क्योंकि हमारे कुल में कोई सन्तान नहीं बची है॥17॥ | mahabharat अध्याय 1.45: जरत्कारुको अपने पितरोंका दर्शन और उनसे वार्तालाप । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
लोकात् पुण्यादिह भ्रष् ट ा: संतानप्रक्षयान्मुने।
प्रणष्टं नस्तपस्तीव्रं न हि नस्तन्तुरस्ति वै॥ १७॥
अनुवाद
हे ऋषिवर! हमारे वंश का नाश होने से हम पुण्यलोक से च्युत हो गए हैं। हमारी घोर तपस्या नष्ट हो गई है, क्योंकि हमारे कुल में कोई सन्तान नहीं बची है॥17॥
O sage! Due to the decline of our lineage, we have been dethroned from the world of virtues. Our intense penance has been destroyed because there are no progeny left in our family.॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥