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mahabharat 1.45.15-16: इसीलिए हम आप जैसे महापुरुष को, जो अपनी वीरता के लिए संसार में विख्यात हैं, पहचान नहीं पा रहे हैं। आप बड़े भाग्यशाली पुरुष हैं, जो हम जैसे महान दुःखी प्राणियों के लिए करुणावश शोक कर रहे हैं। हे ब्रह्मन्! सुनिए, हम आपको अपना परिचय देते हैं। हम यायावर नामक महर्षि हैं, जो अत्यंत कठोर व्रत का पालन करते हैं। ॥15-16॥   |   mahabharat अध्याय 1.45: जरत्कारुको अपने पितरोंका दर्शन और उनसे वार्तालाप   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 45: जरत्कारुको अपने पितरोंका दर्शन और उनसे वार्तालाप  »  श्लोक 15-16
 
 
श्लोक  1.45.15-16 
येन त्वा नाभिजानीमो लोके विख्यातपौरुषम्।
वृद्धो भवान् महाभागो यो न: शोच्यान् सुदु:खितान्॥ १५॥
शोचते चैव कारुण्याच्छृणु ये वै वयं द्विज।
यायावरा नाम वयमृषय: संशितव्रता:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
इसीलिए हम आप जैसे महापुरुष को, जो अपनी वीरता के लिए संसार में विख्यात हैं, पहचान नहीं पा रहे हैं। आप बड़े भाग्यशाली पुरुष हैं, जो हम जैसे महान दुःखी प्राणियों के लिए करुणावश शोक कर रहे हैं। हे ब्रह्मन्! सुनिए, हम आपको अपना परिचय देते हैं। हम यायावर नामक महर्षि हैं, जो अत्यंत कठोर व्रत का पालन करते हैं। ॥15-16॥
 
That is why we are not able to recognize a great man like you who is famous in the world for his bravery. You are a very fortunate man who is grieving out of compassion for pitiable creatures like us who are in great pain. O Brahman! Listen, we will introduce ourselves to you. We are Maharishi named Yayavar who follow a very strict vow. ॥15-16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)