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mahabharat 1.45.11: ‘अथवा यदि तुम सब लोग मेरी समस्त तपस्या के द्वारा इस संकट को दूर कर सको, तो ऐसा करो।’॥11॥   |   mahabharat अध्याय 1.45: जरत्कारुको अपने पितरोंका दर्शन और उनसे वार्तालाप   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 45: जरत्कारुको अपने पितरोंका दर्शन और उनसे वार्तालाप  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.45.11 
अथवापि समग्रेण तरन्तु तपसा मम।
भवन्त: सर्व एवेह काममेवं विधीयताम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
‘अथवा यदि तुम सब लोग मेरी समस्त तपस्या के द्वारा इस संकट को दूर कर सको, तो ऐसा करो।’॥11॥
 
‘Or if you all can overcome this crisis here through all my austerities, then you may do so.’॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)