Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.45.1: उग्रश्रवाजी कहते हैं - इन्हीं दिनों महातपस्वी जरत्कारु मुनि सम्पूर्ण पृथ्वी पर भ्रमण कर रहे थे। जहाँ कहीं संध्या होती, वे वहीं रुक जाते॥1॥   |   mahabharat अध्याय 1.45: जरत्कारुको अपने पितरोंका दर्शन और उनसे वार्तालाप   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 45: जरत्कारुको अपने पितरोंका दर्शन और उनसे वार्तालाप  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  1.45.1 
सौतिरुवाच
एतस्मिन्नेव काले तु जरत्कारुर्महातपा:।
चचार पृथिवीं कृत्स्नां यत्रसायंगृहो मुनि:॥ १॥
 
 
अनुवाद
उग्रश्रवाजी कहते हैं - इन्हीं दिनों महातपस्वी जरत्कारु मुनि सम्पूर्ण पृथ्वी पर भ्रमण कर रहे थे। जहाँ कहीं संध्या होती, वे वहीं रुक जाते॥1॥
 
Ugrashravaji says - It was during these days that the great ascetic Jaratkaru Muni was roaming all over the earth. Wherever it was evening, he would stop there.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)