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mahabharat 1.44.8: जब राजमंत्रियों ने देखा कि राजा जनमेजय शत्रुओं को परास्त करने में सक्षम हो गये हैं, तो वे काशी के राजा सुवर्णवर्मा के पास गये और उनकी पुत्री वपुष्टमा के लिए प्रार्थना की।   |   mahabharat अध्याय 1.44: जनमेजयका राज्याभिषेक और विवाह   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 44: जनमेजयका राज्याभिषेक और विवाह  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.44.8 
ततस्तु राजानममित्रतापनं
समीक्ष्य ते तस्य नृपस्य मन्त्रिण:।
सुवर्णवर्माणमुपेत्य काशिपं
वपुष्टमार्थं वरयाम्प्रचक्रमु:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
जब राजमंत्रियों ने देखा कि राजा जनमेजय शत्रुओं को परास्त करने में सक्षम हो गये हैं, तो वे काशी के राजा सुवर्णवर्मा के पास गये और उनकी पुत्री वपुष्टमा के लिए प्रार्थना की।
 
When the royal ministers saw that King Janamejaya had become capable of subduing the enemies, they went to King Suvarnavarma of Kashi and pleaded for his daughter Vapustama.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)