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mahabharat 1.44.7: नृपश्रेष्ठ जनमेजय की बुद्धि बचपन में ही श्रेष्ठ पुरुषों के समान थी। अपने वीर पितामह महाराज युधिष्ठिर के समान ही श्रेष्ठ योद्धाओं में अग्रणी कौरव जनमेजय भी मन्त्रियों और पुरोहितों के साथ धर्मपूर्वक राज्य करने लगे। 7॥   |   mahabharat अध्याय 1.44: जनमेजयका राज्याभिषेक और विवाह   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 44: जनमेजयका राज्याभिषेक और विवाह  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.44.7 
स बाल एवार्यमतिर्नृपोत्तम:
सहैव तैर्मन्त्रिपुरोहितैस्तदा।
शशास राज्यं कुरुपुङ्गवाग्रजो
यथास्य वीर: प्रपितामहस्तथा॥ ७॥
 
 
अनुवाद
नृपश्रेष्ठ जनमेजय की बुद्धि बचपन में ही श्रेष्ठ पुरुषों के समान थी। अपने वीर पितामह महाराज युधिष्ठिर के समान ही श्रेष्ठ योद्धाओं में अग्रणी कौरव जनमेजय भी मन्त्रियों और पुरोहितों के साथ धर्मपूर्वक राज्य करने लगे। 7॥
 
Even in his childhood, the intelligence of Nripashreshtha Janamejaya was equal to that of the best men. Like his brave grandfather Maharaj Yudhishthir, Kurus, the leader of the best warriors, Janamejaya also started ruling the kingdom religiously along with the ministers and priests. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)