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mahabharat 1.44.11: वपुष्टमा अपने पति के प्रति निष्ठावान थी। उसकी सुंदरता सर्वत्र विख्यात थी। वह राजा के हरम की सबसे सुंदर स्त्री थी। राजा जनमेजय को पति रूप में पाकर वह उनके अवकाश के समय बड़े स्नेह से उन्हें सुख पहुँचाती थी। 11.   |   mahabharat अध्याय 1.44: जनमेजयका राज्याभिषेक और विवाह   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 44: जनमेजयका राज्याभिषेक और विवाह  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.44.11 
वपुष्टमा चापि वरं पतिव्रता
प्रतीतरूपा समवाप्य भूपतिम्।
भावेन रामा रमयाम्बभूव सा
विहारकालेष्ववरोधसुन्दरी॥ ११॥
 
 
अनुवाद
वपुष्टमा अपने पति के प्रति निष्ठावान थी। उसकी सुंदरता सर्वत्र विख्यात थी। वह राजा के हरम की सबसे सुंदर स्त्री थी। राजा जनमेजय को पति रूप में पाकर वह उनके अवकाश के समय बड़े स्नेह से उन्हें सुख पहुँचाती थी। 11.
 
Vapustama was faithful to her husband. Her beauty was famous everywhere. She was the most beautiful woman in the king's harem. Having got King Janamejaya as her husband, she used to give him pleasure with great affection during his leisure time. 11.
 
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि आस्तीकपर्वणि जनमेजयराज्याभिषेके चतुश्चत्वारिंशोऽध्याय:॥ ४४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत आस्तीकपर्वमें जनमेजयराज्याभिषेकसम्बन्धी

चौवालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ४४॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)