Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.44.10: राजाओं में श्रेष्ठ महापराक्रमी जनमेजय अत्यन्त प्रसन्न होकर रानी वपुष्टमा के साथ सरोवरों तथा पुष्पों से सुसज्जित उद्यानों में उसी प्रकार विचरण करने लगे, जैसे पूर्वकाल में राजा पुरुरवा ने उर्वशी को प्राप्त करके किया था। | mahabharat अध्याय 1.44: जनमेजयका राज्याभिषेक और विवाह । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सर:सु फुल्लेषु वनेषु चैव हि
प्रसन्नचेता विजहार वीर्यवान्।
तथा स राजन्यवरो विजह्रिवान्
यथोर्वशीं प्राप्य पुरा पुरूरवा:॥ १०॥
अनुवाद
राजाओं में श्रेष्ठ महापराक्रमी जनमेजय अत्यन्त प्रसन्न होकर रानी वपुष्टमा के साथ सरोवरों तथा पुष्पों से सुसज्जित उद्यानों में उसी प्रकार विचरण करने लगे, जैसे पूर्वकाल में राजा पुरुरवा ने उर्वशी को प्राप्त करके किया था।
The mighty and mighty Janamejaya, the best of kings, being very pleased, wandered with Queen Vapustama in the lakes and flower-adorned gardens in the same manner as King Pururava had done in the past after getting Urvashi.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥