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mahabharat 1.43.9: तत्पश्चात्, भाग्यशाली विद्वान द्विजश्रेष्ठ कश्यप ने ज्ञानबल से उस राखरूपी वृक्ष को पुनः जीवित कर दिया॥9॥   |   mahabharat अध्याय 1.43: तक्षकका धन देकर काश्यपको लौटा देना और छलसे राजा परीक्षित् के समीप पहुँचकर उन्हें डँसना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 43: तक्षकका धन देकर काश्यपको लौटा देना और छलसे राजा परीक्षित् के समीप पहुँचकर उन्हें डँसना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.43.9 
तत: स भगवान् विद्वान् काश्यपो द्विजसत्तम:।
भस्मराशीकृतं वृक्षं विद्यया समजीवयत्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात्, भाग्यशाली विद्वान द्विजश्रेष्ठ कश्यप ने ज्ञानबल से उस राखरूपी वृक्ष को पुनः जीवित कर दिया॥9॥
 
Thereafter, the fortunate scholar Dwijashrestha Kashyapa brought that tree, which was in the form of ash, back to life with the power of knowledge. 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)