Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.43.7: उग्रश्रवाजी कहते हैं- शौनकजी! कश्यपजी ने राजा नाग के पराक्रम से जलकर भस्म हो चुके उस वृक्ष की समस्त राख एकत्रित करके कहा-॥7॥   |   mahabharat अध्याय 1.43: तक्षकका धन देकर काश्यपको लौटा देना और छलसे राजा परीक्षित् के समीप पहुँचकर उन्हें डँसना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 43: तक्षकका धन देकर काश्यपको लौटा देना और छलसे राजा परीक्षित् के समीप पहुँचकर उन्हें डँसना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.43.7 
सौतिरुवाच
भस्मीभूतं ततो वृक्षं पन्नगेन्द्रस्य तेजसा।
भस्म सर्वं समाहृत्य काश्यपो वाक्यमब्रवीत्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
उग्रश्रवाजी कहते हैं- शौनकजी! कश्यपजी ने राजा नाग के पराक्रम से जलकर भस्म हो चुके उस वृक्ष की समस्त राख एकत्रित करके कहा-॥7॥
 
Ugrashravaji says- Shaunakji! Kashyapa collected all the ashes of that tree which was burnt to ashes due to the might of King Naga and said – ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)