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mahabharat 1.43.6: इस प्रकार उस वृक्ष को जलाकर नागराज ने पुनः कश्यप से कहा - 'द्विजश्रेष्ठ! अब तुम यत्न करके इस वृक्ष को पुनः जीवित कर दो॥6॥   |   mahabharat अध्याय 1.43: तक्षकका धन देकर काश्यपको लौटा देना और छलसे राजा परीक्षित् के समीप पहुँचकर उन्हें डँसना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 43: तक्षकका धन देकर काश्यपको लौटा देना और छलसे राजा परीक्षित् के समीप पहुँचकर उन्हें डँसना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.43.6 
तं दग्ध्वा स नगं नाग: काश्यपं पुनरब्रवीत्।
कुरु यत्नं द्विजश्रेष्ठ जीवयैनं वनस्पतिम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार उस वृक्ष को जलाकर नागराज ने पुनः कश्यप से कहा - 'द्विजश्रेष्ठ! अब तुम यत्न करके इस वृक्ष को पुनः जीवित कर दो॥6॥
 
In this way, after burning that tree, Nagraj again said to Kashyapa – 'Dwijashrestha! Now you try hard and bring this tree back to life. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)