Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.43.5: जैसे ही उस विशाल विषधर सर्प ने वृक्ष को डसा, वृक्ष उसके विष से भर गया और सब ओर से जलने लगा ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 1.43: तक्षकका धन देकर काश्यपको लौटा देना और छलसे राजा परीक्षित् के समीप पहुँचकर उन्हें डँसना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 43: तक्षकका धन देकर काश्यपको लौटा देना और छलसे राजा परीक्षित् के समीप पहुँचकर उन्हें डँसना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.43.5 
स वृक्षस्तेन दष्टस्तु पन्नगेन महात्मना।
आशीविषविषोपेत: प्रजज्वाल समन्तत:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
जैसे ही उस विशाल विषधर सर्प ने वृक्ष को डसा, वृक्ष उसके विष से भर गया और सब ओर से जलने लगा ॥5॥
 
As soon as that huge poisonous serpent bit the tree, the tree became filled with its poison and started burning from all sides. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)