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mahabharat 1.43.4: उग्रश्रवाजी कहते हैं - महात्मा कश्यप की यह बात सुनकर समस्त सर्पों में श्रेष्ठ तक्षक ने पास जाकर वट वृक्ष को काट लिया।   |   mahabharat अध्याय 1.43: तक्षकका धन देकर काश्यपको लौटा देना और छलसे राजा परीक्षित् के समीप पहुँचकर उन्हें डँसना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 43: तक्षकका धन देकर काश्यपको लौटा देना और छलसे राजा परीक्षित् के समीप पहुँचकर उन्हें डँसना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.43.4 
सौतिरुवाच
एवमुक्त: स नागेन्द्र: काश्यपेन महात्मना।
अदशद् वृक्षमभ्येत्य न्यग्रोधं पन्नगोत्तम:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
उग्रश्रवाजी कहते हैं - महात्मा कश्यप की यह बात सुनकर समस्त सर्पों में श्रेष्ठ तक्षक ने पास जाकर वट वृक्ष को काट लिया।
 
Ugrasravaji says - Upon hearing Mahatma Kashyap say this, Takshak, the best amongst all snakes, went near and bit the banyan tree.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)