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mahabharat 1.43.33: 'वह ऋषि सत्यवादी हो, इसलिए यह कीड़ा 'तक्षक' नाम धारण करके मुझे डस ले। ऐसा करने से मेरा पाप नष्ट हो जाएगा।॥ 33॥   |   mahabharat अध्याय 1.43: तक्षकका धन देकर काश्यपको लौटा देना और छलसे राजा परीक्षित् के समीप पहुँचकर उन्हें डँसना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 43: तक्षकका धन देकर काश्यपको लौटा देना और छलसे राजा परीक्षित् के समीप पहुँचकर उन्हें डँसना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  1.43.33 
सत्यवागस्तु स मुनि: कृमिर्मां दशतामयम्।
तक्षको नाम भूत्वा वै तथा परिहृतं भवेत्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
'वह ऋषि सत्यवादी हो, इसलिए यह कीड़ा 'तक्षक' नाम धारण करके मुझे डस ले। ऐसा करने से मेरा पाप नष्ट हो जाएगा।॥ 33॥
 
'That sage should be truthful, so this insect should assume the name of Takshak and bite me. By doing so my sin will be eradicated.॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)