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mahabharat 1.43.30: सृष्टिकर्ता के विधान और ऋषि के वचनों से प्रेरित होकर राजा ने स्वयं उस फल को खा लिया जिस पर तक्षक सर्प बैठा था।   |   mahabharat अध्याय 1.43: तक्षकका धन देकर काश्यपको लौटा देना और छलसे राजा परीक्षित् के समीप पहुँचकर उन्हें डँसना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 43: तक्षकका धन देकर काश्यपको लौटा देना और छलसे राजा परीक्षित् के समीप पहुँचकर उन्हें डँसना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  1.43.30 
विधिना सम्प्रयुक्तो वै ऋषिवाक्येन तेन तु।
यस्मिन्नेव फले नागस्तमेवाभक्षयत् स्वयम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
सृष्टिकर्ता के विधान और ऋषि के वचनों से प्रेरित होकर राजा ने स्वयं उस फल को खा लिया जिस पर तक्षक सर्प बैठा था।
 
Inspired by the law of the Creator and the words of the sage, the king himself ate the fruit on which Takshak the snake was sitting. 30.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)