Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.43.27-29: तत्पश्चात् उन्हें पुरस्कार आदि देकर उसने कहा, "अब आप सब लोग चले जाइए।" उन तपस्वी वेशधारी सर्पों के चले जाने पर राजा ने अपने मंत्रियों और मित्रों से कहा, "ये सब तपस्वियों द्वारा लाए गए बहुत ही स्वादिष्ट फल हैं। आप सब भी मेरे साथ इन्हें खा सकते हैं।" ऐसा कहकर राजा ने अपने मंत्रियों सहित उन फलों को ग्रहण करने की इच्छा व्यक्त की। | mahabharat अध्याय 1.43: तक्षकका धन देकर काश्यपको लौटा देना और छलसे राजा परीक्षित् के समीप पहुँचकर उन्हें डँसना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्पश्चात् उन्हें पुरस्कार आदि देकर उसने कहा, "अब आप सब लोग चले जाइए।" उन तपस्वी वेशधारी सर्पों के चले जाने पर राजा ने अपने मंत्रियों और मित्रों से कहा, "ये सब तपस्वियों द्वारा लाए गए बहुत ही स्वादिष्ट फल हैं। आप सब भी मेरे साथ इन्हें खा सकते हैं।" ऐसा कहकर राजा ने अपने मंत्रियों सहित उन फलों को ग्रहण करने की इच्छा व्यक्त की।
Thereafter, after giving them prizes etc., he said, "Now you all may leave." After the departure of those serpents disguised as ascetics, the king said to his ministers and friends, "These are all very tasty fruits brought by the ascetics. You all may also eat them along with me." Having said this, the king along with his ministers desired to take those fruits. 27-29.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥