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mahabharat 1.43.25: उग्रश्रवाजी कहते हैं - तक्षक की आज्ञा से उन सर्पों ने वैसा ही किया।   |   mahabharat अध्याय 1.43: तक्षकका धन देकर काश्यपको लौटा देना और छलसे राजा परीक्षित् के समीप पहुँचकर उन्हें डँसना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 43: तक्षकका धन देकर काश्यपको लौटा देना और छलसे राजा परीक्षित् के समीप पहुँचकर उन्हें डँसना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.43.25 
सौतिरुवाच
ते तक्षकसमादिष्टास्तथा चक्रुर्भुजङ्गमा:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
उग्रश्रवाजी कहते हैं - तक्षक की आज्ञा से उन सर्पों ने वैसा ही किया।
 
Ugrasravaji says - On Takshak's orders those snakes did the same. 25.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)