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mahabharat 1.43.24-25h: तक्षक ने कहा, "तुम सब लोग अपने कार्य की सफलता के लिए राजा के पास जाओ, किन्तु अधीर मत होओ। तुम्हारे जाने का उद्देश्य राजा को फल, फूल और जल अर्पित करना है।"   |   mahabharat अध्याय 1.43: तक्षकका धन देकर काश्यपको लौटा देना और छलसे राजा परीक्षित् के समीप पहुँचकर उन्हें डँसना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 43: तक्षकका धन देकर काश्यपको लौटा देना और छलसे राजा परीक्षित् के समीप पहुँचकर उन्हें डँसना  »  श्लोक 24-25h
 
 
श्लोक  1.43.24-25h 
तक्षक उवाच
गच्छध्वं यूयमव्यग्रा राजानं कार्यवत्तया॥ २४॥
फलपुष्पोदकं नाम प्रतिग्राहयितुं नृपम्।
 
 
अनुवाद
तक्षक ने कहा, "तुम सब लोग अपने कार्य की सफलता के लिए राजा के पास जाओ, किन्तु अधीर मत होओ। तुम्हारे जाने का उद्देश्य राजा को फल, फूल और जल अर्पित करना है।"
 
Takshak said, "You all should go to the king for the success of your work, but do not be impatient. The purpose of your going is to offer fruits, flowers and water to the king."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)