Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.43.19-22h: महामना कश्यप दिव्य ज्ञान से संपन्न थे। उस समय उन्हें ज्ञात हुआ कि पाण्डव वंश के राजा परीक्षित की आयु समाप्त हो गई है। अतः उन्होंने महर्षि तक्षक से अपनी इच्छानुसार धन लिया और वहाँ से लौट आए। जब महात्मा कश्यप समय पर लौट आए, तो तक्षक तुरंत हस्तिनापुर नगरी पहुँच गया। वहाँ पहुँचकर उसने सुना कि राजा परीक्षित की रक्षा मंत्रों और औषधियों द्वारा विष दूर करने के लिए बड़े प्रयत्न से की जा रही है।॥19-21॥ | mahabharat अध्याय 1.43: तक्षकका धन देकर काश्यपको लौटा देना और छलसे राजा परीक्षित् के समीप पहुँचकर उन्हें डँसना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
महामना कश्यप दिव्य ज्ञान से संपन्न थे। उस समय उन्हें ज्ञात हुआ कि पाण्डव वंश के राजा परीक्षित की आयु समाप्त हो गई है। अतः उन्होंने महर्षि तक्षक से अपनी इच्छानुसार धन लिया और वहाँ से लौट आए। जब महात्मा कश्यप समय पर लौट आए, तो तक्षक तुरंत हस्तिनापुर नगरी पहुँच गया। वहाँ पहुँचकर उसने सुना कि राजा परीक्षित की रक्षा मंत्रों और औषधियों द्वारा विष दूर करने के लिए बड़े प्रयत्न से की जा रही है।॥19-21॥
The illustrious Kashyap was endowed with divine knowledge. At that time he understood that the age of King Parikshit of the Pandava lineage had come to an end. So he took money according to his liking from the great sage Takshak and returned from there. When Mahatma Kashyap returned on time, Takshak immediately reached the city of Hastinapur. On reaching there he heard that King Parikshit was being protected with great efforts by mantras and medicines to remove poison.॥19–21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥