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mahabharat 1.43.18: उग्रश्रवाजी कहते हैं- तक्षक की बात सुनकर परम बुद्धिमान एवं तेजस्वी विप्रवर कश्यप ने कुछ देर तक राजा परीक्षित के विषय में सोचा। 18॥   |   mahabharat अध्याय 1.43: तक्षकका धन देकर काश्यपको लौटा देना और छलसे राजा परीक्षित् के समीप पहुँचकर उन्हें डँसना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 43: तक्षकका धन देकर काश्यपको लौटा देना और छलसे राजा परीक्षित् के समीप पहुँचकर उन्हें डँसना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.43.18 
सौतिरुवाच
तक्षकस्य वच: श्रुत्वा काश्यपो द्विजसत्तम:।
प्रदध्यौ सुमहातेजा राजानं प्रति बुद्धिमान्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
उग्रश्रवाजी कहते हैं- तक्षक की बात सुनकर परम बुद्धिमान एवं तेजस्वी विप्रवर कश्यप ने कुछ देर तक राजा परीक्षित के विषय में सोचा। 18॥
 
Ugrashravaji says - After listening to Takshak, the most intelligent and brilliant Vipravar Kashyapa thought for some time about King Parikshit. 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)