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mahabharat 1.43.17: तक्षक ने कहा - हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! मैं तुम्हें राजा परीक्षित से जितना धन चाहिए, उससे अधिक दूंगा, इसलिए तुम लौट जाओ।   |   mahabharat अध्याय 1.43: तक्षकका धन देकर काश्यपको लौटा देना और छलसे राजा परीक्षित् के समीप पहुँचकर उन्हें डँसना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 43: तक्षकका धन देकर काश्यपको लौटा देना और छलसे राजा परीक्षित् के समीप पहुँचकर उन्हें डँसना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  1.43.17 
तक्षक उवाच
यावद्धनं प्रार्थयसे तस्माद् राज्ञस्ततोऽधिकम्।
अहमेव प्रदास्यामि निवर्तस्व द्विजोत्तम॥ १७॥
 
 
अनुवाद
तक्षक ने कहा - हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! मैं तुम्हें राजा परीक्षित से जितना धन चाहिए, उससे अधिक दूंगा, इसलिए तुम लौट जाओ।
 
Takshak said - O best of Brahmins! I will give you more wealth than what you want from King Parikshit, so go back.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)