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mahabharat 1.43.16: कश्यप बोले - हे सर्पराज तक्षक! मैं धन के लिए ही वहाँ जा रहा हूँ, यदि आप मुझे दे दें तो मैं उस धन को लेकर घर लौट जाऊँगा॥ 16॥   |   mahabharat अध्याय 1.43: तक्षकका धन देकर काश्यपको लौटा देना और छलसे राजा परीक्षित् के समीप पहुँचकर उन्हें डँसना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 43: तक्षकका धन देकर काश्यपको लौटा देना और छलसे राजा परीक्षित् के समीप पहुँचकर उन्हें डँसना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.43.16 
काश्यप उवाच
धनार्थी याम्यहं तत्र तन्मे देहि भुजङ्गम।
ततोऽहं विनिवर्तिष्ये स्वापतेयं प्रगृह्य वै॥ १६॥
 
 
अनुवाद
कश्यप बोले - हे सर्पराज तक्षक! मैं धन के लिए ही वहाँ जा रहा हूँ, यदि आप मुझे दे दें तो मैं उस धन को लेकर घर लौट जाऊँगा॥ 16॥
 
Kashyap said - O King of Snakes Takshak! I am going there only for wealth, if you give it to me then I will take that wealth and return home.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)