Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.43.12: 'हे तप से संपन्न द्विजेन्द्र! जब आप अपनी विद्या के बल से मेरा अथवा मेरे समान किसी अन्य सर्प का विष नष्ट कर सकते हैं, तब मुझे बताइए कि वहाँ जाकर आप किस उद्देश्य की सिद्धि चाहते हैं?॥12॥ | mahabharat अध्याय 1.43: तक्षकका धन देकर काश्यपको लौटा देना और छलसे राजा परीक्षित् के समीप पहुँचकर उन्हें डँसना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'हे तप से संपन्न द्विजेन्द्र! जब आप अपनी विद्या के बल से मेरा अथवा मेरे समान किसी अन्य सर्प का विष नष्ट कर सकते हैं, तब मुझे बताइए कि वहाँ जाकर आप किस उद्देश्य की सिद्धि चाहते हैं?॥12॥
'O Dwijendra, who is endowed with penance, when you can destroy the poison of me or any other snake like me by the power of your knowledge, then tell me, what purpose are you trying to achieve by going there?॥ 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥