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mahabharat 1.43.10: पहले उसने उसमें से एक अंकुर निकाला, फिर उसमें दो पत्ते लगाए। इसी प्रकार उसने उस विशाल वृक्ष को पत्तों, शाखाओं और उपशाखाओं सहित पुनः पहले जैसा खड़ा कर दिया॥10॥   |   mahabharat अध्याय 1.43: तक्षकका धन देकर काश्यपको लौटा देना और छलसे राजा परीक्षित् के समीप पहुँचकर उन्हें डँसना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 43: तक्षकका धन देकर काश्यपको लौटा देना और छलसे राजा परीक्षित् के समीप पहुँचकर उन्हें डँसना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.43.10 
अङ्कुरं कृतवांस्तत्र तत: पर्णद्वयान्वितम्।
पलाशिनं शाखिनं च तथा विटपिनं पुन:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
पहले उसने उसमें से एक अंकुर निकाला, फिर उसमें दो पत्ते लगाए। इसी प्रकार उसने उस विशाल वृक्ष को पत्तों, शाखाओं और उपशाखाओं सहित पुनः पहले जैसा खड़ा कर दिया॥10॥
 
First he took out a sprout from it, then made it have two leaves. In the same way he made that big tree stand again like before with leaves, branches and sub-branches.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)