Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.42.9: केवल आत्म-संयम (मन का संयम) ही क्षमाशील मनुष्यों को सफलता दिलाता है। क्षमाशील मनुष्यों के लिए यह लोक और परलोक दोनों ही कल्याणकारी हैं॥ 9॥ | mahabharat अध्याय 1.42: शमीकका अपने पुत्रको समझाना और गौरमुखको राजा परीक्षित् के पास भेजना, राजाद्वारा आत्मरक्षाकी व्यवस्था तथा तक्षक नाग और काश्यपकी बातचीत । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
केवल आत्म-संयम (मन का संयम) ही क्षमाशील मनुष्यों को सफलता दिलाता है। क्षमाशील मनुष्यों के लिए यह लोक और परलोक दोनों ही कल्याणकारी हैं॥ 9॥
Only self-control (control of mind) helps those who are forgiving to achieve success. For those who are forgiving, both this world and the next are beneficial.॥ 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥