Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.42.5: फिर तुम्हें उपदेश देने से क्या लाभ, तुम तो अभी बालक हो। तुमने तो सदैव तपस्या द्वारा अपने को दिव्य शक्ति से संपन्न किया है। योगजनित ऐश्वर्य से संपन्न ऐसे प्रभावशाली एवं महापुरुष भी अत्यन्त क्रोधित हो जाते हैं; फिर तुम जैसे बालक के क्रोधित होने की तो बात ही क्या है॥5॥ | mahabharat अध्याय 1.42: शमीकका अपने पुत्रको समझाना और गौरमुखको राजा परीक्षित् के पास भेजना, राजाद्वारा आत्मरक्षाकी व्यवस्था तथा तक्षक नाग और काश्यपकी बातचीत । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
फिर तुम्हें उपदेश देने से क्या लाभ, तुम तो अभी बालक हो। तुमने तो सदैव तपस्या द्वारा अपने को दिव्य शक्ति से संपन्न किया है। योगजनित ऐश्वर्य से संपन्न ऐसे प्रभावशाली एवं महापुरुष भी अत्यन्त क्रोधित हो जाते हैं; फिर तुम जैसे बालक के क्रोधित होने की तो बात ही क्या है॥5॥
Then what is the point of preaching to you, you are still a child. You have always endowed yourself with divine power through austerities. Even such influential and illustrious men who are blessed with the opulence generated by yoga, become very angry; then what is there to say about a child like you getting angry.॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥