Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.42.35: अतः उसने सोचा कि मैं सर्पराज का विष उतारकर उसे पुनः जीवित कर दूँगा। ऐसा करने से मुझे धन तो मिलेगा ही, साथ ही समाज का कल्याण करने वाले राजा को पुनर्जीवित करके पुण्य भी प्राप्त होगा॥ 35॥   |   mahabharat अध्याय 1.42: शमीकका अपने पुत्रको समझाना और गौरमुखको राजा परीक्षित् के पास भेजना, राजाद्वारा आत्मरक्षाकी व्यवस्था तथा तक्षक नाग और काश्यपकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 42: शमीकका अपने पुत्रको समझाना और गौरमुखको राजा परीक्षित् के पास भेजना, राजाद्वारा आत्मरक्षाकी व्यवस्था तथा तक्षक नाग और काश्यपकी बातचीत  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  1.42.35 
तं दष्टं पन्नगेन्द्रेण करिष्येऽहमपज्वरम्।
तत्र मेऽर्थश्च धर्मश्च भवितेति विचिन्तयन्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
अतः उसने सोचा कि मैं सर्पराज का विष उतारकर उसे पुनः जीवित कर दूँगा। ऐसा करने से मुझे धन तो मिलेगा ही, साथ ही समाज का कल्याण करने वाले राजा को पुनर्जीवित करके पुण्य भी प्राप्त होगा॥ 35॥
 
So he thought that I will remove the poison from the King of Snakes and bring him back to life. By doing this I will not only get wealth but I will also get a good deed by reviving the king who is doing good for the society.॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)