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mahabharat 1.42.33: जब सातवाँ दिन आया, तब मन्त्रशास्त्र में श्रेष्ठ विद्वान् द्विज राजा कश्यप की चिकित्सा करने आए ॥33॥   |   mahabharat अध्याय 1.42: शमीकका अपने पुत्रको समझाना और गौरमुखको राजा परीक्षित् के पास भेजना, राजाद्वारा आत्मरक्षाकी व्यवस्था तथा तक्षक नाग और काश्यपकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 42: शमीकका अपने पुत्रको समझाना और गौरमुखको राजा परीक्षित् के पास भेजना, राजाद्वारा आत्मरक्षाकी व्यवस्था तथा तक्षक नाग और काश्यपकी बातचीत  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  1.42.33 
प्राप्ते च दिवसे तस्मिन् सप्तमे द्विजसत्तम:।
काश्यपोऽभ्यागमद् विद्वांस्तं राजानं चिकित्सितुम् ॥ ३३ ॥
 
 
अनुवाद
जब सातवाँ दिन आया, तब मन्त्रशास्त्र में श्रेष्ठ विद्वान् द्विज राजा कश्यप की चिकित्सा करने आए ॥33॥
 
When the seventh day came, Dwija, the best expert in Mantrashastra was coming to treat the king Kashyap. 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)