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mahabharat 1.42.32: उस समय महल में बैठे महाराजा से कोई भी नहीं मिल सकता था। यहाँ तक कि महल से बाहर जाने के बाद हवा का भी प्रवेश बंद कर दिया गया था।   |   mahabharat अध्याय 1.42: शमीकका अपने पुत्रको समझाना और गौरमुखको राजा परीक्षित् के पास भेजना, राजाद्वारा आत्मरक्षाकी व्यवस्था तथा तक्षक नाग और काश्यपकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 42: शमीकका अपने पुत्रको समझाना और गौरमुखको राजा परीक्षित् के पास भेजना, राजाद्वारा आत्मरक्षाकी व्यवस्था तथा तक्षक नाग और काश्यपकी बातचीत  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  1.42.32 
न चैनं कश्चिदारूढं लभते राजसत्तमम्।
वातोऽपि निश्चरंस्तत्र प्रवेशे विनिवार्यते॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
उस समय महल में बैठे महाराजा से कोई भी नहीं मिल सकता था। यहाँ तक कि महल से बाहर जाने के बाद हवा का भी प्रवेश बंद कर दिया गया था।
 
At that time no one could meet the Maharaja who was sitting in the palace. Even the air was stopped from re-entering after leaving the palace. 32.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)