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mahabharat 1.42.31: वहाँ रहकर धर्मज्ञ राजा सब ओर से सुरक्षित होकर अपने मन्त्रियों के साथ समस्त राजकार्य की व्यवस्था करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 1.42: शमीकका अपने पुत्रको समझाना और गौरमुखको राजा परीक्षित् के पास भेजना, राजाद्वारा आत्मरक्षाकी व्यवस्था तथा तक्षक नाग और काश्यपकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 42: शमीकका अपने पुत्रको समझाना और गौरमुखको राजा परीक्षित् के पास भेजना, राजाद्वारा आत्मरक्षाकी व्यवस्था तथा तक्षक नाग और काश्यपकी बातचीत  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  1.42.31 
राजकार्याणि तत्रस्थ: सर्वाण्येवाकरोच्च स:।
मन्त्रिभि: सह धर्मज्ञ: समन्तात् परिरक्षित:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
वहाँ रहकर धर्मज्ञ राजा सब ओर से सुरक्षित होकर अपने मन्त्रियों के साथ समस्त राजकार्य की व्यवस्था करने लगे।
 
Staying there, the Dharma-knowing king, safe from all sides, started making arrangements for all the royal affairs along with his ministers. 31.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)