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mahabharat 1.42.3: शमीक बोला - बेटा! मैं जानता हूँ कि तुम्हारा प्रभाव भयंकर है, तुम बड़े सत्यवादी हो, तुमने पहले कभी झूठ नहीं बोला; इसलिए यह शाप झूठा नहीं होगा।   |   mahabharat अध्याय 1.42: शमीकका अपने पुत्रको समझाना और गौरमुखको राजा परीक्षित् के पास भेजना, राजाद्वारा आत्मरक्षाकी व्यवस्था तथा तक्षक नाग और काश्यपकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 42: शमीकका अपने पुत्रको समझाना और गौरमुखको राजा परीक्षित् के पास भेजना, राजाद्वारा आत्मरक्षाकी व्यवस्था तथा तक्षक नाग और काश्यपकी बातचीत  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.42.3 
शमीक उवाच
जानाम्युग्रप्रभावं त्वां तात सत्यगिरं तथा।
नानृतं चोक्तपूर्वं ते नैतन्मिथ्या भविष्यति॥ ३॥
 
 
अनुवाद
शमीक बोला - बेटा! मैं जानता हूँ कि तुम्हारा प्रभाव भयंकर है, तुम बड़े सत्यवादी हो, तुमने पहले कभी झूठ नहीं बोला; इसलिए यह शाप झूठा नहीं होगा।
 
Shameek said - Son! I know your influence is fierce, you are very truthful, you have never told a lie before; hence this curse will not be false.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)