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mahabharat 1.42.23: उग्रश्रवाज कहते हैं: ये कठोर वचन सुनकर कुरुणपुत्र राजा परीक्षित ऋषि के प्रति अपराध करने के कारण हृदय में दुःखी हो गए।   |   mahabharat अध्याय 1.42: शमीकका अपने पुत्रको समझाना और गौरमुखको राजा परीक्षित् के पास भेजना, राजाद्वारा आत्मरक्षाकी व्यवस्था तथा तक्षक नाग और काश्यपकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 42: शमीकका अपने पुत्रको समझाना और गौरमुखको राजा परीक्षित् के पास भेजना, राजाद्वारा आत्मरक्षाकी व्यवस्था तथा तक्षक नाग और काश्यपकी बातचीत  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  1.42.23 
सौतिरुवाच
इति श्रुत्वा वचो घोरं स राजा कुरुनन्दन:।
पर्यतप्यत तत् पापं कृत्वा राजा महातपा:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
उग्रश्रवाज कहते हैं: ये कठोर वचन सुनकर कुरुणपुत्र राजा परीक्षित ऋषि के प्रति अपराध करने के कारण हृदय में दुःखी हो गए।
 
Ugrasravāja says: On hearing these harsh words, King Parīkṣit, the son of Kuruṇā, became distressed in his heart for having committed a crime against the sage. 23.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)