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सौतिरुवाच
इति श्रुत्वा वचो घोरं स राजा कुरुनन्दन:।
पर्यतप्यत तत् पापं कृत्वा राजा महातपा:॥ २३॥
अनुवाद
उग्रश्रवाज कहते हैं: ये कठोर वचन सुनकर कुरुणपुत्र राजा परीक्षित ऋषि के प्रति अपराध करने के कारण हृदय में दुःखी हो गए।
Ugrasravāja says: On hearing these harsh words, King Parīkṣit, the son of Kuruṇā, became distressed in his heart for having committed a crime against the sage. 23.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥