श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 42: शमीकका अपने पुत्रको समझाना और गौरमुखको राजा परीक्षित् के पास भेजना, राजाद्वारा आत्मरक्षाकी व्यवस्था तथा तक्षक नाग और काश्यपकी बातचीत  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.42.15 
सोऽभिगम्य तत: शीघ्रं नरेन्द्रं कुरुवर्धनम्।
विवेश भवनं राज्ञ: पूर्वं द्वा:स्थैर्निवेदित:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
वहाँ से गौरमुख शीघ्रतापूर्वक महाराज परीक्षित के पास गया, जिन्होंने कुरुवंश की शक्ति बढ़ा दी थी। राजधानी पहुँचकर द्वारपाल ने पहले महाराज को अपने आगमन की सूचना दी और उनकी अनुमति पाकर गौरमुख ने राजमहल में प्रवेश किया॥15॥
 
From there Gaurmukh quickly went to Maharaja Parikshit, who had increased the power of the Kuru clan. On reaching the capital, the gatekeeper first informed the Maharaja about his arrival and on getting his permission, Gaurmukh entered the royal palace.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)