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mahabharat 1.41.9: श्रृंगिन्! तुम्हारे पिता, जिन्होंने नियमपूर्वक व्रत किया था, अब भी उसी स्थिति में बैठे हैं और राजा परीक्षित अपनी राजधानी हस्तिनापुर चले गए हैं॥9॥   |   mahabharat अध्याय 1.41: शृंगी ऋषिका राजा परीक्षित् को शाप देना और शमीकका अपने पुत्रको शान्त करते हुए शापको अनुचित बताना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 41: शृंगी ऋषिका राजा परीक्षित् को शाप देना और शमीकका अपने पुत्रको शान्त करते हुए शापको अनुचित बताना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.41.9 
शृङ्गिंस्तव पिता सोऽपि तथैवास्ते यतव्रत:।
सोऽपि राजा स्वनगरं प्रस्थितो गजसाह्वयम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
श्रृंगिन्! तुम्हारे पिता, जिन्होंने नियमपूर्वक व्रत किया था, अब भी उसी स्थिति में बैठे हैं और राजा परीक्षित अपनी राजधानी हस्तिनापुर चले गए हैं॥9॥
 
Shringin! Your father, who strictly observed the fast, is still sitting in the same position and King Parikshit has gone to his capital Hastinapura. 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)