Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.41.7-8: राजा भूख, प्यास और थकान से व्याकुल था। इधर तुम्हारे पिता लकड़ी के समान निश्चल बैठे थे। राजा ने तुम्हारे पिता से भागे हुए हिरण के बारे में बार-बार पूछा, किन्तु मौनी पुरुष होने के कारण उन्होंने कोई उत्तर नहीं दिया। तब राजा ने धनुष की नोक से एक मरा हुआ साँप उठाकर अपने कंधे पर रख लिया। 7-8. | mahabharat अध्याय 1.41: शृंगी ऋषिका राजा परीक्षित् को शाप देना और शमीकका अपने पुत्रको शान्त करते हुए शापको अनुचित बताना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तं स्थाणुभूतं तिष्ठन्तं क्षुत्पिपासाश्रमातुर:।
पुन: पुनर्मृगं नष्टं पप्रच्छ पितरं तव॥ ७॥
स च मौनव्रतोपेतो नैव तं प्रत्यभाषत।
तस्य राजा धनुष्कोटॺा सर्पं स्कन्धे समासजत्॥ ८॥
अनुवाद
राजा भूख, प्यास और थकान से व्याकुल था। इधर तुम्हारे पिता लकड़ी के समान निश्चल बैठे थे। राजा ने तुम्हारे पिता से भागे हुए हिरण के बारे में बार-बार पूछा, किन्तु मौनी पुरुष होने के कारण उन्होंने कोई उत्तर नहीं दिया। तब राजा ने धनुष की नोक से एक मरा हुआ साँप उठाकर अपने कंधे पर रख लिया। 7-8.
The king was troubled with hunger, thirst and fatigue. Here your father was sitting motionless like a log. The king repeatedly asked your father about the runaway deer, but being a man of silence, he did not answer anything. Then the king picked up a dead snake from the tip of the bow and placed it on his shoulder. 7-8.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥