Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.41.5-6: कृष्ण बोले - अभिमन्यु के पुत्र राजा परीक्षित अकेले ही शिकार खेलने आए थे। उन्होंने एक वेगवान और भयंकर मृग को बाण से घायल कर दिया; किन्तु उस विशाल वन में विचरण करते हुए राजा को वह मृग कहीं दिखाई नहीं दिया। तब उन्होंने तुम्हारे मौन पिता को देखा और उनके विषय में पूछा। 5-6. | mahabharat अध्याय 1.41: शृंगी ऋषिका राजा परीक्षित् को शाप देना और शमीकका अपने पुत्रको शान्त करते हुए शापको अनुचित बताना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कृश उवाच
स राजा मृगयां यात: परिक्षिदभिमन्युज:।
ससार मृगमेकाकी विद्ध्वा बाणेन शीघ्रगम्॥ ५॥
न चापश्यन्मृगं राजा चरंस्तस्मिन् महावने।
पितरं ते स दृष्ट्वैव पप्रच्छानभिभाषिणम्॥ ६॥
अनुवाद
कृष्ण बोले - अभिमन्यु के पुत्र राजा परीक्षित अकेले ही शिकार खेलने आए थे। उन्होंने एक वेगवान और भयंकर मृग को बाण से घायल कर दिया; किन्तु उस विशाल वन में विचरण करते हुए राजा को वह मृग कहीं दिखाई नहीं दिया। तब उन्होंने तुम्हारे मौन पिता को देखा और उनके विषय में पूछा। 5-6.
Krisha said - King Parikshit, son of Abhimanyu, had come alone to hunt. He pierced a swift and ferocious deer with an arrow; but while roaming in that vast forest, the king did not see the deer anywhere. Then he saw your silent father and asked about him. 5-6.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥