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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 41: शृंगी ऋषिका राजा परीक्षित् को शाप देना और शमीकका अपने पुत्रको शान्त करते हुए शापको अनुचित बताना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.41.4 
शृंगॺुवाच
किं मे पित्रा कृतं तस्य राज्ञोऽनिष्टं दुरात्मन:।
ब्रूहि तत् कृश तत्त्वेन पश्य मे तपसो बलम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
श्रृंगी ने कहा, "कृष्ण! मुझे ठीक-ठीक बताओ कि मेरे पिता ने उस दुष्टबुद्धि राजा के प्रति क्या अपराध किया था? फिर मेरी तपस्या का बल देखना।"
 
Shringi said - Krish! Tell me exactly, what crime did my father commit against that evil-minded king? Then see the power of my penance.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)