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mahabharat 1.41.3: कृष्ण बोले - "पिताजी! आज राजा परीक्षित अपने शिकार के पीछे दौड़े आए हैं। उन्होंने आपके पिता के कंधे पर एक मरा हुआ साँप रख दिया है।"   |   mahabharat अध्याय 1.41: शृंगी ऋषिका राजा परीक्षित् को शाप देना और शमीकका अपने पुत्रको शान्त करते हुए शापको अनुचित बताना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 41: शृंगी ऋषिका राजा परीक्षित् को शाप देना और शमीकका अपने पुत्रको शान्त करते हुए शापको अनुचित बताना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.41.3 
कृश उवाच
राज्ञा परिक्षिता तात मृगयां परिधावता।
अवसक्त: पितुस्तेऽद्य मृत: स्कन्धे भुजङ्गम:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
कृष्ण बोले - "पिताजी! आज राजा परीक्षित अपने शिकार के पीछे दौड़े आए हैं। उन्होंने आपके पिता के कंधे पर एक मरा हुआ साँप रख दिया है।"
 
Krisha said - Father! Today King Parikshit came running after his prey. He has placed a dead snake on your father's shoulder.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)