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mahabharat 1.41.25: परीक्षित अपने परदादा युधिष्ठिर आदि की भाँति हमारी विशेष रक्षा करते हैं। हे पराक्रमी पुत्र! प्रत्येक राजा को अपनी प्रजा की इसी प्रकार रक्षा करनी चाहिए। 25॥   |   mahabharat अध्याय 1.41: शृंगी ऋषिका राजा परीक्षित् को शाप देना और शमीकका अपने पुत्रको शान्त करते हुए शापको अनुचित बताना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 41: शृंगी ऋषिका राजा परीक्षित् को शाप देना और शमीकका अपने पुत्रको शान्त करते हुए शापको अनुचित बताना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.41.25 
परिक्षित्तु विशेषेण यथास्य प्रपितामह:।
रक्षत्यस्मांस्तथा राज्ञा रक्षितव्या: प्रजा विभो॥ २५॥
 
 
अनुवाद
परीक्षित अपने परदादा युधिष्ठिर आदि की भाँति हमारी विशेष रक्षा करते हैं। हे पराक्रमी पुत्र! प्रत्येक राजा को अपनी प्रजा की इसी प्रकार रक्षा करनी चाहिए। 25॥
 
Parikshit especially protects us like his great grandfather Yudhishthir etc. Mighty son! Every king should protect his people in this way. 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)