Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.41.23-24: पुत्र! राजा के बिना हम सुखपूर्वक धर्म का पालन नहीं कर सकते। पिता! धर्म पर दृष्टि रखने वाले राजाओं द्वारा रक्षित होकर हम अधिकाधिक धर्म का पालन कर पाते हैं। अतः हमारे पुण्य कर्मों में उनका भी भाग होता है। अतः वर्तमान राजा परीक्षित का अपराध क्षमा किया जाना चाहिए। 23-24 | mahabharat अध्याय 1.41: शृंगी ऋषिका राजा परीक्षित् को शाप देना और शमीकका अपने पुत्रको शान्त करते हुए शापको अनुचित बताना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पुत्र! राजा के बिना हम सुखपूर्वक धर्म का पालन नहीं कर सकते। पिता! धर्म पर दृष्टि रखने वाले राजाओं द्वारा रक्षित होकर हम अधिकाधिक धर्म का पालन कर पाते हैं। अतः हमारे पुण्य कर्मों में उनका भी भाग होता है। अतः वर्तमान राजा परीक्षित का अपराध क्षमा किया जाना चाहिए। 23-24
Son! We cannot perform Dharma happily without a king. Father! We are able to perform Dharma to the maximum extent by being protected by kings who keep an eye on Dharma. Therefore, they also have a share in our good deeds. Therefore, the crime of the present King Parikshit should be forgiven. 23-24.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥