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mahabharat 1.41.20-22: शमीक बोले - बेटा! तुमने शाप देकर वह नहीं किया जो मुझे अच्छा लगा। यह तपस्वियों का धर्म नहीं है। हम महाराज परीक्षित के राज्य में रहते हैं और उनके द्वारा न्यायपूर्वक हमारी रक्षा की जाती है। अतः मुझे उनका शाप देना अच्छा नहीं लगता। हम जैसे मुनियों को वर्तमान राजा परीक्षित के अपराधों को सब प्रकार से क्षमा कर देना चाहिए। बेटा! यदि धर्म का नाश होता है, तो वह मनुष्य का नाश करता है, इसमें संशय नहीं है। यदि राजा हमारी रक्षा न करें, तो हमें बहुत कष्ट उठाना पड़ सकता है।   |   mahabharat अध्याय 1.41: शृंगी ऋषिका राजा परीक्षित् को शाप देना और शमीकका अपने पुत्रको शान्त करते हुए शापको अनुचित बताना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 41: शृंगी ऋषिका राजा परीक्षित् को शाप देना और शमीकका अपने पुत्रको शान्त करते हुए शापको अनुचित बताना  »  श्लोक 20-22
 
 
श्लोक  1.41.20-22 
शमीक उवाच
न मे प्रियं कृतं तात नैष धर्मस्तपस्विनाम्।
वयं तस्य नरेन्द्रस्य विषये निवसामहे॥ २०॥
न्यायतो रक्षितास्तेन तस्य शापं न रोचये।
सर्वथा वर्तमानस्य राज्ञो ह्यस्मद्विधै: सदा॥ २१॥
क्षन्तव्यं पुत्र धर्मो हि हतो हन्ति न संशय:।
यदि राजा न संरक्षेत् पीडा न: परमा भवेत्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
शमीक बोले - बेटा! तुमने शाप देकर वह नहीं किया जो मुझे अच्छा लगा। यह तपस्वियों का धर्म नहीं है। हम महाराज परीक्षित के राज्य में रहते हैं और उनके द्वारा न्यायपूर्वक हमारी रक्षा की जाती है। अतः मुझे उनका शाप देना अच्छा नहीं लगता। हम जैसे मुनियों को वर्तमान राजा परीक्षित के अपराधों को सब प्रकार से क्षमा कर देना चाहिए। बेटा! यदि धर्म का नाश होता है, तो वह मनुष्य का नाश करता है, इसमें संशय नहीं है। यदि राजा हमारी रक्षा न करें, तो हमें बहुत कष्ट उठाना पड़ सकता है।
 
Shamik said - Son! You have not done what I liked by cursing. This is not the religion of ascetics. We live in the kingdom of Maharaj Parikshit and we are protected by him with justice. Therefore, I do not like to curse him. Saints like us should forgive the crimes of the present King Parikshit in every way. Son! If Dharma is destroyed, it destroys the man, there is no doubt about it. If the king does not protect us, we may suffer a lot.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)