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mahabharat 1.41.17-19: वह दुःखी होकर रोने लगा। उसने अपने पिता से कहा- 'पुत्र! तुम्हारा अपमान सुनकर मैंने क्रोध में आकर उस दुष्ट बुद्धि वाले राजा परीक्षित को शाप दे दिया है। वह कुरुकुल-संहारक भी उसी भयंकर शाप का पात्र है। आज, सातवें दिन, सर्पराज तक्षक उस पापी को घोर यमलोक में भेज देगा।' हे ब्रह्मन्! इस प्रकार उसके पिता शमीक ने अपने क्रोधित पुत्र से कहा।   |   mahabharat अध्याय 1.41: शृंगी ऋषिका राजा परीक्षित् को शाप देना और शमीकका अपने पुत्रको शान्त करते हुए शापको अनुचित बताना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 41: शृंगी ऋषिका राजा परीक्षित् को शाप देना और शमीकका अपने पुत्रको शान्त करते हुए शापको अनुचित बताना  »  श्लोक 17-19
 
 
श्लोक  1.41.17-19 
दु:खाच्चाश्रूणि मुमुचे पितरं चेदमब्रवीत् ।
श्रुत्वेमां धर्षणां तात तव तेन दुरात्मना॥ १७॥
राज्ञा परिक्षिता कोपादशपं तमहं नृपम्।
यथार्हति स एवोग्रं शापं कुरुकुलाधम:।
सप्तमेऽहनि तं पापं तक्षक: पन्नगोत्तम:॥ १८॥
वैवस्वतस्य सदनं नेता परमदारुणम्।
तमब्रवीत् पिता ब्रह्मंस्तथा कोपसमन्वितम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
वह दुःखी होकर रोने लगा। उसने अपने पिता से कहा- 'पुत्र! तुम्हारा अपमान सुनकर मैंने क्रोध में आकर उस दुष्ट बुद्धि वाले राजा परीक्षित को शाप दे दिया है। वह कुरुकुल-संहारक भी उसी भयंकर शाप का पात्र है। आज, सातवें दिन, सर्पराज तक्षक उस पापी को घोर यमलोक में भेज देगा।' हे ब्रह्मन्! इस प्रकार उसके पिता शमीक ने अपने क्रोधित पुत्र से कहा।
 
He started crying in sorrow. He said to his father- 'Son! I have cursed that evil-minded King Parikshit in anger after hearing about your insult. That Kurukula-slayer deserves the same terrible curse. Today, on the seventh day, King of Snakes Takshak will send that sinner to the dreadful Yamaloka.' O Brahman! Thus his father Shamik said to his angry son.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)