Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.41.15: उग्रश्रवाजी कहते हैं - इस प्रकार शाप देकर अत्यन्त क्रोध से युक्त होकर श्रृंगी अपने पिता के पास आया, जो कंधे पर मरा हुआ सर्प लिए हुए गोशाला में बैठे हुए थे। | mahabharat अध्याय 1.41: शृंगी ऋषिका राजा परीक्षित् को शाप देना और शमीकका अपने पुत्रको शान्त करते हुए शापको अनुचित बताना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उग्रश्रवाजी कहते हैं - इस प्रकार शाप देकर अत्यन्त क्रोध से युक्त होकर श्रृंगी अपने पिता के पास आया, जो कंधे पर मरा हुआ सर्प लिए हुए गोशाला में बैठे हुए थे।
Ugrasravāji says - Having cursed in this manner with great anger, Shringi came to his father, who was sitting in that cattle shed with a dead snake on his shoulder.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥