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mahabharat 1.41.10: उग्रश्रवाजी कहते हैं - शौनकजी! अपने पिता के कंधे पर मरा हुआ सर्प रखे जाने का समाचार सुनकर श्रृंगी ऋषि का पुत्र क्रोध से भर गया। क्रोध से उसकी आँखें लाल हो गईं।   |   mahabharat अध्याय 1.41: शृंगी ऋषिका राजा परीक्षित् को शाप देना और शमीकका अपने पुत्रको शान्त करते हुए शापको अनुचित बताना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 41: शृंगी ऋषिका राजा परीक्षित् को शाप देना और शमीकका अपने पुत्रको शान्त करते हुए शापको अनुचित बताना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.41.10 
सौतिरुवाच
श्रुत्वैवमृषिपुत्रस्तु शवं कन्धे प्रतिष्ठितम्।
कोपसंरक्तनयन: प्रज्वलन्निव मन्युना॥ १०॥
 
 
अनुवाद
उग्रश्रवाजी कहते हैं - शौनकजी! अपने पिता के कंधे पर मरा हुआ सर्प रखे जाने का समाचार सुनकर श्रृंगी ऋषि का पुत्र क्रोध से भर गया। क्रोध से उसकी आँखें लाल हो गईं।
 
Ugrasravaji says - Shaunakji! On hearing the news of a dead snake being placed on his father's shoulder, the son of the sage Shringi was filled with anger. His eyes turned red with rage.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)