Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.40.7: उग्रश्रवाजी बोले - नागराज वासुकि ने एकाग्र होकर भली-भांति विचार करके समस्त नागों को यह संदेश दिया - 'मैं अपनी बहन का विवाह ऋषि जरत्कारु के साथ करना चाहता हूँ।' | mahabharat अध्याय 1.40: जरत्कारुकी तपस्या, राजा परीक्षित् का उपाख्यान तथा राजाद्वारा मुनिके कंधेपर मृतक साँप रखनेके कारण दु:खी हुए कृशका शृंगीको उत्तेजित करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उग्रश्रवाजी बोले - नागराज वासुकि ने एकाग्र होकर भली-भांति विचार करके समस्त नागों को यह संदेश दिया - 'मैं अपनी बहन का विवाह ऋषि जरत्कारु के साथ करना चाहता हूँ।'
Ugrasravaji said - King of Serpents Vasuki after concentrating and thinking well, gave this message to all the snakes - 'I want to get my sister married to the sage Jaratkaru.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥