Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.40.6: शौनकजी बोले - हे सारथिपुत्र! मैंने आपके द्वारा पूर्व में बताई गई जरत्कारु नाम की व्युत्पत्ति सुनी है। अब मैं यह जानना चाहता हूँ कि ऋषि आस्तिक का जन्म कैसे हुआ। शौनकजी के ये वचन सुनकर उग्रश्रवाजी ने पुराणों के अनुसार आस्तिक के जन्म की कथा सुनाई। | mahabharat अध्याय 1.40: जरत्कारुकी तपस्या, राजा परीक्षित् का उपाख्यान तथा राजाद्वारा मुनिके कंधेपर मृतक साँप रखनेके कारण दु:खी हुए कृशका शृंगीको उत्तेजित करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शौनक उवाच
उक्तं नाम यथापूर्वं सर्वं तच्छ्रुतवानहम्।
यथा तु जातो ह्यास्तीक एतदिच्छामि वेदितुम्।
तच्छ्रुत्वा वचनं तस्य सौति: प्रोवाच शास्त्रत:॥ ६॥
अनुवाद
शौनकजी बोले - हे सारथिपुत्र! मैंने आपके द्वारा पूर्व में बताई गई जरत्कारु नाम की व्युत्पत्ति सुनी है। अब मैं यह जानना चाहता हूँ कि ऋषि आस्तिक का जन्म कैसे हुआ। शौनकजी के ये वचन सुनकर उग्रश्रवाजी ने पुराणों के अनुसार आस्तिक के जन्म की कथा सुनाई।
Shaunakji said - O son of a charioteer! I have heard the etymology of the name Jaratkaru that you have told earlier. Now I want to know how the sage Aastik was born. On hearing these words of Shaunakji, Ugrashravaji told the story of Aastik's birth according to the Puranas.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥