Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.40.32: हे महामुनि! आपके पिता ने कोई अनुचित कार्य नहीं किया था; इसलिए जैसे मेरे पिता का अपमान हुआ, वैसे ही आपके पिता के प्रति हुए अनादर से मैं अत्यंत दुःखी हूँ॥32॥ | mahabharat अध्याय 1.40: जरत्कारुकी तपस्या, राजा परीक्षित् का उपाख्यान तथा राजाद्वारा मुनिके कंधेपर मृतक साँप रखनेके कारण दु:खी हुए कृशका शृंगीको उत्तेजित करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे महामुनि! आपके पिता ने कोई अनुचित कार्य नहीं किया था; इसलिए जैसे मेरे पिता का अपमान हुआ, वैसे ही आपके पिता के प्रति हुए अनादर से मैं अत्यंत दुःखी हूँ॥32॥
O great sage! Your father did not commit any wrong deed; therefore, just as my own father was insulted, I am extremely saddened by the disrespect shown to your father. ॥ 32॥
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि आस्तीकपर्वणि परिक्षिदुपाख्याने चत्वारिंशोऽध्याय:॥ ४०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत आस्तीकपर्वमें परीक्षित्-उपाख्यानविषयक चालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ४०॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥