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mahabharat 1.40.31: कहाँ गया तेरा पुरुषत्व का अभिमान, कहाँ गए तेरे गर्व भरे शब्द? जब तू चुपचाप अपने पिता को शव ले जाते हुए देख रहा है!॥31॥   |   mahabharat अध्याय 1.40: जरत्कारुकी तपस्या, राजा परीक्षित् का उपाख्यान तथा राजाद्वारा मुनिके कंधेपर मृतक साँप रखनेके कारण दु:खी हुए कृशका शृंगीको उत्तेजित करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 40: जरत्कारुकी तपस्या, राजा परीक्षित् का उपाख्यान तथा राजाद्वारा मुनिके कंधेपर मृतक साँप रखनेके कारण दु:खी हुए कृशका शृंगीको उत्तेजित करना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  1.40.31 
क्व ते पुरुषमानित्वं क्व ते वाचस्तथाविधा:।
दर्पजा: पितरं द्रष्टा यस्त्वं शवधरं तथा॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
कहाँ गया तेरा पुरुषत्व का अभिमान, कहाँ गए तेरे गर्व भरे शब्द? जब तू चुपचाप अपने पिता को शव ले जाते हुए देख रहा है!॥31॥
 
Where is your pride of manhood, where have your proud words gone? When you are silently watching your father carrying a corpse!॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)